गोगी गैंग का खतरनाक नेटवर्क: ‘बदबस जी-जेन’ था हथियार लेने का कोड, चोरी की बाइक-कार भी करता था इंतजाम

हरियाणवी गायक अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में पुलिस ने गोगी गिरोह के कथित हथियार और चोरी के वाहनों के सप्लाई नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी जुटाई है। पुलिस के अनुसार, ‘बदबस जी-जेन’ कोडवर्ड के जरिए बरेली से दिल्ली, बहादुरगढ़ और सोनीपत तक हथियार पहुंचाए जाते थे। वारदातों के लिए चोरी के बाइक और कार भी पहले से जुटाने की बात सामने आई है।

‘बदबस जी-जेन’ था हथियार सप्लाई का कोड

पुलिस के मुताबिक, कथित गिरोह के सदस्य पिछले तीन-चार वर्षों से ‘बदबस जी-जेन’ कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हुए हथियारों की सप्लाई कर रहे थे। यह नेटवर्क बरेली से शुरू होकर दिल्ली और बहादुरगढ़ के रास्ते सोनीपत तक पहुंचता था। इसके बाद हथियार कथित तौर पर गिरोह के शार्प शूटरों तक पहुंचाए जाते थे।

जांच में यह बात भी सामने आई है कि अंकित बालियान की हत्या में इस्तेमाल पिस्टल भी इसी कथित नेटवर्क के जरिये बरेली से दिल्ली, बहादुरगढ़ होते हुए सोनीपत पहुंची थी। पुलिस के अनुसार, बाद में यह पिस्टल मुठभेड़ में मारे गए सुमित और मोहित तक पहुंची थी।

कोडवर्ड में छिपे थे शहरों के नाम

पुलिस की जांच के अनुसार, ‘बदबस’ शब्द के अलग-अलग अक्षरों का इस्तेमाल शहरों के संकेत के तौर पर किया जाता था। ‘ब’ से बरेली, ‘द’ से दिल्ली, दूसरे ‘ब’ से बहादुरगढ़ और ‘स’ से सोनीपत का संकेत लिया जाता था।

वहीं, ‘जी-जेन’ का इस्तेमाल गिरोह से जुड़े युवा सदस्यों के लिए किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, हथियारों की सप्लाई के दौरान सदस्य इसी कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे। विदेश में बैठे गिरोह से जुड़े चिराग के सोशल मीडिया खातों में भी इस कोडवर्ड के इस्तेमाल की बात जांच में सामने आई है।

यूपी से उत्तराखंड और पंजाब तक नेटवर्क की पड़ताल

पुलिस के अनुसार, कथित गोगी गिरोह का नेटवर्क हरियाणा के अलावा पंजाब, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक फैला होने की बात सामने आई है।

जांच में सोनीपत, रोहतक, करनाल, हिसार, भिवानी, सिरसा, पानीपत और दिल्ली के सरोजनी नगर के अलावा बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और देहरादून तक हथियार पहुंचाए जाने की जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस बरेली में हथियार सप्लाई करने वाले मुख्य कथित सप्लायर की तलाश में भी जुटी है।

वारदात से महीनों पहले जुटाए जाते थे वाहन

जांच में कथित नेटवर्क के बारे में एक और अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, वारदात के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन भी पहले से जुटाए जाते थे।

बताया जा रहा है कि शामली, मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से बाइक और कारें वारदात से करीब चार महीने पहले चोरी कराई जाती थीं। इन्हीं चोरी के वाहनों से शूटर अलग-अलग राज्यों में वारदात करने पहुंचते थे।

पुलिस के मुताबिक, वारदात से कुछ मिनट पहले वाहन की नंबर प्लेट बदलकर आसपास के किसी जिले के वाहन का नंबर लगा दिया जाता था।

सोनीपत और बहादुरगढ़ बताए गए प्रमुख ठिकाने

एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जांच में सोनीपत और बहादुरगढ़ को कथित हथियार सप्लाई के प्रमुख ठिकानों के रूप में चिह्नित किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, सड़क किनारे या झाड़ियों के पास शार्प शूटरों को ‘बदबस जी-जेन’ कोडवर्ड बताने पर हथियार सौंपे जाते थे। इसके साथ एडवांस रकम दिए जाने की बात भी सामने आई है।

पुलिस अब सोनीपत, बहादुरगढ़, दिल्ली, बरेली और आसपास के जिलों के लोगों की कथित भूमिका की जांच कर रही है।

पानीपत के दो युवक हिरासत में

अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस ने पानीपत के दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस को आशंका है कि दोनों ने फरार शूटर सत्यम और आर्यन की मदद की हो सकती है।

हालांकि, पूछताछ पूरी होने के बाद ही दोनों युवकों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

अंकित के पिता बोले- पुलिस पर पूरा भरोसा

बंतीखेड़ा गांव में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान और रालोद नेता राजन जावला ने अंकित के पिता सतबीर सिंह से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की।

सतबीर सिंह ने कहा कि उन्हें पुलिस पर पूरा विश्वास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हत्याकांड में फरार अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होगी और परिवार को न्याय मिलेगा।

गोगी गिरोह से कनेक्शन की जांच बनी अहम कड़ी

अंकित हत्याकांड की जांच में सामने आया कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क अब पुलिस के लिए अहम कड़ी बन गया है। हथियारों की सप्लाई, चोरी के वाहनों की व्यवस्था, शूटरों की आवाजाही और अलग-अलग राज्यों में संभावित संपर्कों की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अंकित बालियान की हत्या तक इस कथित नेटवर्क की भूमिका किस स्तर तक थी।

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