एशियन गेम्स: रजत पदक जीतने के बाद वित्या रामराज का बयान, बोलीं- मेडल का रंग बदलना चाहती थी

एशियन गेम्स 2026 में भारत की 4×400 मीटर मिश्रित रिले टीम ने रजत पदक जीता। भारतीय टीम में शामिल वित्या रामराज ने इस पदक को अपनी जुड़वां बहन नित्या रामराज को समर्पित किया। वित्या ने कहा कि पिछली बार उनकी बहन उनके साथ एशियन गेम्स में थीं, लेकिन इस बार उनकी काफी कमी महसूस हुई।
भारतीय टीम ने 3:14.46 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया। बहरीन ने 3:12.87 सेकेंड के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि वियतनाम 3:14.54 सेकेंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
पिछले एशियाड में जीते थे तीन पदक
वित्या रामराज ने बताया कि पिछले एशियन गेम्स में उन्होंने तीन पदक जीते थे। इसी वजह से इस बार उनका लक्ष्य अपने प्रदर्शन में सुधार करना और पदक का रंग बदलना था।
वित्या ने कहा, “पिछले एशियन गेम्स में मैंने तीन मेडल जीते थे, इसलिए इस बार मैंने अपने मेडल का रंग बदलने की कोशिश की।”
उन्होंने बताया कि उनकी जुड़वां बहन नित्या भी एथलीट हैं। नित्या ने पिछले एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, लेकिन 2026 के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकीं। वित्या ने कहा कि इस बार उन्हें अपनी बहन की काफी याद आई, इसलिए उन्होंने रजत पदक उन्हें समर्पित किया।
कोच के निर्देशों पर रखा ध्यान
वित्या ने अपने प्रदर्शन में कोच की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि रेस के दौरान उनका पूरा ध्यान कोच के निर्देशों पर था। कोच उन्हें लगातार प्रोत्साहित कर रहे थे और रणनीति समझा रहे थे।
वित्या के मुताबिक, रेस के दौरान उनका लक्ष्य सिर्फ अपना लेग पूरा करना और बैटन को सही तरीके से आगे पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि उन्होंने फिनिश लाइन तक अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की।
मिश्रित रिले में भारत का लगातार तीसरा पदक
4×400 मीटर मिश्रित रिले में भारत ने लगातार तीसरी बार एशियन गेम्स में पदक जीता है। जकार्ता 2018 में भारत ने स्वर्ण, जबकि हांगझू 2023 में रजत पदक जीता था। 2026 में भी भारतीय टीम ने रजत पदक हासिल किया।





