स्कूल जाते समय अकेले सड़क पार करते हैं दो-तिहाई छात्र: दिल्ली के 4,789 बच्चों पर अध्ययन में चौंकाने वाले खुलासे

दिल्ली के स्कूली बच्चों के सड़क सुरक्षा को लेकर एक अध्ययन में चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक, करीब 65 फीसदी छात्र स्कूल जाते समय मुख्य सड़क अकेले पार करते हैं, जबकि लगभग 60 फीसदी छात्रों को सड़क सुरक्षा संकेतों की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
यह अध्ययन जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से किया है। इसमें दिल्ली के चार सरकारी स्कूलों के 4,789 छात्रों को शामिल किया गया। ये स्कूल ऐसे इलाकों में स्थित हैं, जिन्हें सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। अध्ययन के निष्कर्ष शोध पत्रिका Injury Prevention में प्रकाशित हुए हैं।
65 फीसदी छात्र अकेले पार करते हैं सड़क
अध्ययन के अनुसार, स्कूल आने-जाने के दौरान करीब 65 फीसदी छात्र मुख्य सड़क अकेले पार करते हैं। घर लौटते समय भी कई किशोर बिना किसी वयस्क की निगरानी के व्यस्त सड़कों और राजमार्गों से गुजरते हैं।
स्कूल से घर जाने के लिए करीब 80 फीसदी लड़के और 49 फीसदी लड़कियां पैदल चलती हैं। साइकिल से आने-जाने वाले छात्रों में भी कई ऐसे हैं, जो अधिक यातायात वाली सड़कों पर अकेले सफर करते हैं।
तेज रफ्तार वाहन और हादसे बड़ी चिंता
छात्रों से स्कूल आने-जाने के दौरान महसूस होने वाले खतरों के बारे में भी पूछा गया। इसमें सड़क हादसे और तेज रफ्तार वाहन प्रमुख चिंताओं के रूप में सामने आए।
इसके अलावा छात्रों ने लूटपाट और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। लड़कों में लूटपाट का डर अधिक था, जबकि लड़कियों ने छेड़छाड़ और लैंगिक उत्पीड़न को लेकर ज्यादा चिंता व्यक्त की।
60 फीसदी छात्रों को सड़क संकेतों की सही जानकारी नहीं
अध्ययन में करीब 60 फीसदी छात्रों को आम सड़क सुरक्षा संकेतों की खराब जानकारी होने की बात सामने आई। स्कूल और पैदल यात्रियों से जुड़े संकेतों की पहचान में भी छात्रों का प्रदर्शन कमजोर रहा।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, केवल कक्षा में सड़क सुरक्षा की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण, अनुकरण आधारित अभ्यास और सहपाठी शिक्षा जैसे तरीके छात्रों को बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं।
हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल में भी कमी
अध्ययन में सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता सामने आई। मोटरसाइकिल पर पीछे बैठने वाले छात्रों में 39 फीसदी लड़कों और 46 फीसदी लड़कियों ने बताया कि वे कभी हेलमेट नहीं पहनते।
कार से आने-जाने वाले छात्रों की संख्या कम थी, लेकिन उनमें भी सीट बेल्ट के नियमित इस्तेमाल में कमी पाई गई।
बच्चों के साथ सड़क व्यवस्था में बदलाव जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि सड़क सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बच्चों पर नहीं डाली जा सकती। यदि बच्चे पैदल या साइकिल से स्कूल जा रहे हैं तो उनके रास्ते भी सुरक्षित होने चाहिए।
इसके लिए बेहतर पैदल मार्ग, पर्याप्त रोशनी, वाहनों की गति नियंत्रित करने के उपाय और सुरक्षित सड़क पार करने की व्यवस्था जरूरी है। साथ ही यातायात नियमों का प्रभावी पालन भी कराया जाना चाहिए।
अध्ययन में इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्कूल मार्ग, बेहतर सड़क बुनियादी ढांचा और प्रभावी सड़क सुरक्षा शिक्षा को साथ लेकर चलना होगा।





