मॉरीशस के बाद कई देशों की नजर भारतीय तेल पर, युद्ध के बीच रिफाइनरियों की बढ़ी धाक

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की तेल परिशोधन क्षमता तेजी से मजबूत होती जा रही है। भारत अब केवल कच्चे तेल का बड़ा आयातक ही नहीं, बल्कि पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख निर्यातकों में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। भारतीय रिफाइनरियों से तैयार ईंधन की मांग कई देशों में बढ़ रही है और इसी कड़ी में मॉरीशस के साथ पांच साल का बड़ा ईंधन आपूर्ति समझौता किया गया है।
भारत और मॉरीशस के बीच हुए इस समझौते के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन मॉरीशस की पेट्रोल, हाई-स्पीड डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की आयात जरूरतों को पूरा करेगी। समझौते के दस्तावेजों का आदान-प्रदान केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मॉरीशस यात्रा के दौरान किया गया। दोनों देशों के बीच तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए अलग से समझौता ज्ञापन भी हुआ है।
भारतीय रिफाइनरियों की बढ़ती क्षमता का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। स्पेन और फ्रांस जैसे देशों के बाद मॉरीशस भी भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति लेने वाले देशों की सूची में मजबूती से जुड़ गया है। इटली, तंजानिया और जॉर्डन समेत कई देशों में भी भारतीय ईंधन की मांग बढ़ी है। इसके अलावा सिंगापुर, श्रीलंका, नीदरलैंड, यूएई, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई देशों तक भारत से तैयार पेट्रोलियम उत्पाद पहुंच रहे हैं।
भारत की रणनीति प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न देशों से कच्चा तेल खरीदने, उसे अपनी आधुनिक रिफाइनरियों में परिष्कृत करने और फिर तैयार पेट्रोलियम उत्पादों को दुनिया के अलग-अलग बाजारों में निर्यात करने की है। इस रणनीति से भारत को नए निर्यात बाजार मिल रहे हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
देश में वर्तमान में 23 रिफाइनरियां हैं, जिनसे हर साल बड़ी मात्रा में परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद तैयार होते हैं। भारत तैयार ईंधन का शुद्ध निर्यातक भी है। नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को भारत पहले से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करता रहा है और अब मॉरीशस के साथ पांच साल का समझौता उसकी ऊर्जा कूटनीति के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में जारी संघर्षों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे समय में भारत एक भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मॉरीशस के साथ हुआ नया समझौता हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और आर्थिक भूमिका को भी मजबूती देगा।
भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी तेजी देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 67.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती मांग के बीच भारतीय रिफाइनरियां अब देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं।





