नेपाल त्रासदी: ठाणे के 10 यात्री लापता, राहत-बचाव अभियान जारी; मृतकों का आंकड़ा 1225 पहुंचा

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद आई फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अब तक नेपाल में 1,204 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

इस बीच महाराष्ट्र के ठाणे जिले के 10 कैलाश मानसरोवर यात्री भी अब तक लापता हैं। परिवारों को उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद है और प्रशासन लगातार उनकी तलाश के लिए नेपाल में संबंधित एजेंसियों तथा टूर ऑपरेटरों के संपर्क में है।

ठाणे के 10 कैलाश मानसरोवर यात्री अब भी लापता

नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ में तिमुरे स्थित चीनी इमिग्रेशन चेकपॉइंट के आसपास भारी तबाही हुई। बाढ़ में सड़कें और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई, जिसके बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ठाणे के 10 यात्रियों से संपर्क टूट गया।

ठाणे से यात्रा पर गए दो पर्यटकों के सुरक्षित घर लौटने की जानकारी है। डोंबिवली निवासी प्रकाश शांताराम माने और उनकी पत्नी प्रतिभा सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। वहीं, बाकी 10 यात्रियों के परिजन लगातार प्रशासन से उन्हें जल्द तलाशने की अपील कर रहे हैं।

लापता यात्रियों में सतीश विनायक पाटणकर और उनकी पत्नी रेखा पाटणकर भी शामिल हैं। सतीश के भाई संजय पाटणकर के अनुसार, बाढ़ आने के बाद से परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

अन्य लापता यात्रियों में समीर मुकुंद जोशी, अपर्णा समीर जोशी, सुनील सुदर्शन सुभेदार, संजय राजमल पाटिल, नलिनी संजय पाटिल, रजनीश रघुनाथ नातू, यशस भंड और अभिषेक घोने शामिल हैं।

ठाणे जिला प्रशासन ने बताया कि यात्रियों का पता लगाने के लिए नेपाल में राहत एवं बचाव दलों और संबंधित टूर ऑपरेटरों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

166 भारतीयों का रेस्क्यू, 410 नागरिक चीन से लौटे

भारत ने नेपाल में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र गए 410 भारतीय नागरिक चीन से लौट चुके हैं।

भारत ने नेपाल को राहत सामग्री की पांचवीं खेप भी भेजी है। भारतीय वायुसेना के विमान से करीब 5.5 टन चिकित्सा सामग्री काठमांडू पहुंचाई गई। इसमें दवाएं, एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक और सर्जिकल उपकरण शामिल हैं।

इसके अलावा 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और आधुनिक रेस्क्यू उपकरण भी नेपाल भेजे गए हैं। भारत अब तक नेपाल को करीब 74 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है।

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। खासतौर पर हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

भारतीय सुरंग बचाव दल ने अपना बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है, जिससे चिलीमे सुरंग तक पहुंचना आसान हो सके। नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान में दल मलबे से भरी सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक पहुंच चुका है।

भारी मशीनरी को सुरंग तक पहुंचाने के लिए अस्थायी सड़क बनाने की संभावना भी तलाशी जा रही है।

ग्लेशियर टूटने के बाद आई थी भीषण बाढ़

26 अगस्त की सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेंदे घाटी में ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ, पानी, चट्टानों और मलबे का तेज बहाव शुरू हुआ। इससे ल्हेंदे खोला और बाद में भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिसने आसपास के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई।

इस आपदा ने नेपाल और चीन के बीच सीमा पार आपदा चेतावनी तंत्र को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दुर्गम हिमालयी इलाकों में निगरानी और समय पर चेतावनी जारी करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

1204 मौतें, 4216 लोग अब भी लापता

नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, बुधवार शाम तक 1,204 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और 4,216 लोग अब भी लापता थे। करीब 12 हजार लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत एवं बचाव अभियान में 21,314 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।

लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 583 विदेशी नागरिकों के अब भी लापता होने की जानकारी है।

काठमांडू समेत प्रभावित इलाकों में शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं। वहीं, मलबे, सुरंगों और नदी किनारे लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

नेपाल में जलवायु संकट पर पीएम बलेंद्र शाह ने जताई चिंता

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संसद में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि इस आपदा ने नेपाल के भविष्य और बदलते जलवायु संकट को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। राहत एवं बचाव अभियान के साथ अब प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण और बुनियादी ढांचे को बहाल करने की चुनौती भी सामने है।

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