ट्रेकिंग-तीर्थयात्रा के लिए मशहूर था यह इलाका, बाढ़ ने मचाई तबाही; पर्यटकों के लिए खास था यह मौसम

नेपाल में बाढ़ से भीषण तबाही: तीर्थयात्रियों और ट्रेकर्स के पसंदीदा इलाके में मचा हाहाकार, सड़कें-बस्तियां बहीं; लापता लोगों का सही आंकड़ा जुटाना बना बड़ी चुनौती
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। यह वही इलाका है, जहां इस मौसम में बड़ी संख्या में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु, ट्रेकिंग करने वाले पर्यटक, व्यापारी और स्थानीय यात्री पहुंचते हैं। रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा जैसे धार्मिक अवसरों के कारण भी इस क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है।
अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में सड़कें, पुल, बस्तियां और संपर्क मार्गों को भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इस दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। पहाड़ों, नदियों और टूटे हुए रास्तों के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं है।
यह क्षेत्र लांगटांग घाटी, स्याब्रुबेसी, तिमुरे और अन्य प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स के लिए जाना जाता है, जबकि गोसाईंकुंडा, मुक्तिनाथ और अन्य धार्मिक स्थल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पर्यटन और तीर्थयात्रा यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी बड़ा आधार हैं।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाले सभी यात्रियों का कोई व्यापक और एकीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बाढ़ के समय इलाके में कितने पर्यटक और तीर्थयात्री मौजूद थे और कितने लोग अब भी लापता हैं, इसका सटीक आंकड़ा जुटाना मुश्किल हो रहा है। बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल के इस महत्वपूर्ण पर्यटन और धार्मिक क्षेत्र में राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।





