चढ़ावा चोरी की जांच में सामने आईं कई बातें, अविनाश पर 85 बार चोरी का आरोप; 700 खातों में चंपत के नाम नहीं

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट में CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विवरण दिया गया है। चार्जशीट के अनुसार, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि CCTV फुटेज में 85 बार चढ़ावे की रकम चोरी करते और चार बार अन्य आरोपियों को इसमें मदद करते दिखाई दिया।

पुलिस के अनुसार, करुणेश पांडेय दो बार रकम चोरी करते और 68 बार अन्य आरोपियों की मदद करते दिखाई दिया। वहीं, मनीष कुमार यादव 16 बार चढ़ावे की रकम अपने पास रखते और 19 बार अन्य आरोपियों का सहयोग करते नजर आया।

चार्जशीट में रमाशंकर मिश्र के एक बार रकम हटाकर अपने पास रखने, लवकुश मिश्रा के एक बार चोरी करने और 52 बार अन्य आरोपियों की मदद करने का उल्लेख है। अनुकल्प मिश्र 56 बार अन्य आरोपियों को चढ़ावे की रकम हटाने में सहयोग करते दिखाई दिए।

CDR में लगातार संपर्क का दावा

चार्जशीट में संबंधित अवधि के दौरान आरोपियों के बीच लगातार फोन संपर्क होने का दावा किया गया है। पुलिस ने CCTV, डिजिटल, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के बीच समन्वय और कथित आपराधिक साजिश के साक्ष्य मिलने की बात कही है।

पुलिस का आरोप है कि चढ़ावे की रकम की चोरी और आपराधिक न्यासभंग के लिए सुनियोजित तरीके से काम किया गया। हालांकि, ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।

25 से 30 जुलाई के फुटेज का भी जिक्र

चार्जशीट में 25 से 30 जुलाई 2026 के CCTV फुटेज का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, इस दौरान गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम की गिनती के समय अविनाश शुक्ला उर्फ शनि रकम हटाकर अपने पास रखते दिखाई दिया।

मोबाइल डेटा की जांच में अनुकल्प मिश्रा के फोन से अविनाश शुक्ला और लवकुश मिश्रा के साथ चढ़ावे की रकम को लेकर बातचीत मिलने का दावा किया गया है। चार्जशीट के अनुसार, इन संदेशों में नकदी के बंडलों को रखने, छिपाने, बदलने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से संबंधित बातचीत का उल्लेख है।

700 बैंक खातों की जांच

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान करीब 700 बैंक खातों की पड़ताल की। इनमें ट्रस्टियों, आरोपियों, संदिग्धों, गणना कर्मचारियों और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों के खाते शामिल थे। ट्रस्ट के बैंक खातों के लेनदेन की भी जांच की गई।

चार्जशीट में कहा गया है कि चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला। पुलिस ने संदिग्धों और आरोपियों के खातों में रकम के लेनदेन की भी जांच की और यह पता लगाने की कोशिश की कि रकम किन खातों से होकर गुजरी।

डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खातों के लेनदेन की तुलना भी अन्य आरोपियों और संदिग्धों के खातों से की गई।

अधिवक्ता संघ ने जांच पर उठाए सवाल

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अधिवक्ता संघ ने अदालत में जांच को लेकर सवाल उठाए। संघ ने दावा किया कि साक्ष्य के तौर पर दिए गए कुछ अधिवक्ताओं के शपथपत्रों पर विवेचक ने कार्रवाई नहीं की।

अधिवक्ता संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों को आरोपी बनाने के बजाय गवाह बनाया गया। संघ की ओर से मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की मांग की गई है।

इन आरोपों और जांच से जुड़े विवादों पर अंतिम स्थिति अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

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