ओडिशा संकट: ईंधन बचाने के लिए कॉलेज कैंटीन में पूरी-वड़ा और बोंडा की बिक्री कम करने का आदेश

ओडिशा सरकार ने राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों के हॉस्टल और कैंटीन के खाने को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। वैश्विक स्तर पर खाद्य सामग्री, खाद और ईंधन की आपूर्ति से जुड़े संकटों के बीच उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों से तेल की खपत कम करने और छात्रों को कम तेल वाले भोजन के प्रति जागरूक करने को कहा है।

विभाग की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि कॉलेज कैंटीन और हॉस्टल के मेन्यू में पूरी, वड़ा और बोंडा जैसे अधिक तेल में तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों को कम किया जाए। इसके स्थान पर ऐसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिनमें तेल का इस्तेमाल कम हो और पोषण से भी समझौता न हो।

उच्च शिक्षा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी रमेश चंद्र बेहेरा ने कॉलेजों के प्रिंसिपलों को पत्र भेजकर इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया को लगातार सप्लाई चेन में रुकावटों और विभिन्न संकटों का सामना करना पड़ा है। हाल के संघर्षों के कारण भी भोजन, खाद और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही गई है।

सरकार का कहना है कि इन परिस्थितियों का आर्थिक असर कई देशों पर पड़ा है और भारत भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों से संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल की दिशा में छोटे लेकिन प्रभावी कदम उठाने को कहा गया है।

निर्देशों के अनुसार, कॉलेज प्रशासन हॉस्टल और कैंटीन में खाना बनाते समय तेल का उपयोग कम करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगा। खासतौर पर नाश्ते में ज्यादा तेल वाली चीजों की जगह कम तेल में तैयार होने वाले विकल्पों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।

विभाग ने यह भी कहा है कि जहां संभव हो, बाहर से मंगाए जाने वाले पाम, सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के विकल्पों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए जाएं। इसके बजाय पारंपरिक खाद्य तेलों जैसे घी, सरसों तेल और मूंगफली तेल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

सरकार का उद्देश्य केवल तेल की खपत कम करना ही नहीं, बल्कि छात्रों के बीच स्वस्थ खानपान को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी है। कॉलेजों के प्रिंसिपलों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मेन्यू में बदलाव के दौरान भोजन की पौष्टिकता प्रभावित न हो।

इसके साथ ही नेशनल सर्विस स्कीम यानी एनएसएस और यूथ रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों को भी जागरूकता अभियान से जोड़ने की योजना है। स्वयंसेवक लोगों को रोजमर्रा के भोजन में तेल का सीमित और संतुलित उपयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे।

ओडिशा सरकार के इस फैसले के बाद अब कॉलेज कैंटीन और हॉस्टलों के मेन्यू में बदलाव देखने को मिल सकता है। छात्रों को पूरी, वड़ा और बोंडा जैसे डीप फ्राई खाद्य पदार्थ कम मिलेंगे, जबकि कम तेल और पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता दिए जाने की तैयारी है।

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